Short Poems on Diwali in Hindi Language 2017

In this article we’ve a huge collection of Short Poems on Diwali in Hindi Language 2017. Happy Diwali Hindi Poems are the best way to convey your to your friends, family and dear ones. Deepawali or Diwali is certainly the biggest and the brightest of all Hindu festivals. This day symbolizes the victory of light over dark. This year (2017) is on 19th October. If you are searching Happy Diwali Poems in Hindi collection then you are at the right place, here you’ll get Special Happy Diwali Poems for Kids & Children, Heart Touching Diwali Kavita, Inspirational Poems on Diwali in Hindi, Best Happy Deepawali Poems for Greeting Images, Happy Diwali Wishes Poems and many more. Wish you Happy Diwali 2017  🙂

Beautiful Poems on Diwali in Hindi Language for Wishes Messages

Poems on Diwali in Hindi Language Fonts
Greeting Image of Poems on Diwali in Hindi Languge

 

1) Short Hindi Poems On Diwali For Kids

दिवाली रोज मनाएं
फूलझड़ी फूल बिखेरे
चकरी चक्कर खाए
अनार उछला आसमान तक
रस्सी-बम धमकाए
सांप की गोली हो गई लम्बी
रेल धागे पर दौड़ लगाए
आग लगाओ रॉकेट को तो
वो दुनिया नाप आए
टिकड़ी के संग छोटे-मोटे
बम बच्चों को भाए
ऐसा लगता है दिवाली
हम तुम रोज मनाएं।

– संदीप फाफरिया ‘सृजन’

 

2) दिवाली की रात है आई

दीपों की पंक्ति में हँसती,
दिवाली की रात है आई.

दीपा, राजू ने मिल-जुल कर,
घर, आँगन की करी सफाई.

पूजा की थाली में सजते,
मेवा, कुमकुम, फूल, मिठाई.

फूलझड़ी नाचे मतवाली,
नाचे फिरकी और हवाई.

खिल खिल करते हँसे अनार,
बम्बों ने है धूम मचाई.

पुण्य सदा जीता है जग में,
यही तो है अटल सच्चाई.

प्रेम प्यार का भाव बताती,
दिवाली की रात है आई.

– राजेन्द्र निशेश

 

3) Motivational Diwali Kavita in Hindi Wordings

वह मंगल दीप दिवाली थी
दीपो से जगमग थाली थी

कोई दिये जला कर तोड़ गया
आशा की किरण को रोक गया

इस बार ना ये हो पाएगा
अंधियारा ना टिक पाएगा

कर ले कोशिश कोई लाख मगर

कोई दिया ना बूझने पाएगा

जब रात में बारह बजते हैं
सब लक्ष्मी पूजा करते हैं

रात की काली माया के लिये
दीपों से उजाला करते हैं
दिवाली खूब मनाएंगे
लड्डू और पेड़ा खाएंगे

अंतर्मन के अंधेरे को..
दीपो से दूर भगाएँगे

 

4) दीप पर्व Kavita on Diwali

है दीप पर्व आने वाला
हमको भी दीप जलाना है
मन के अंदर जो बसा हुआ
सारा अंधियार मिटाना है

हम दीप जला तो लेते हैं
बाहर उजियारा कर लेते
मन का मंदिर सूना रहता
बस रस्म गुजारा कर लेते

इस बार मगर कुछ नया करें
अंतस का दीप जगाना है

बाहर का अंधियार मिटा
फिर भी ये राह अबूझी है
जब तक अंतर्मन दीप बुझा
देवत्व राह अनबूझी है

सद्ज्ञान राह फैलाकर के
सारा मानस चमकाना है
है दीप पर्व आने वाला।

– देवपुत्र

 

5) दीपावली पर बाल-मन की कविता

दीपों का त्योहार दीवाली।
खुशियों का त्योहार दीवाली॥

वनवास पूरा कर आये श्रीराम।
अयोध्या के मन भाये श्रीराम।।

घर-घर सजे , सजे हैं आँगन।
जलते पटाखे, फ़ुलझड़ियाँ बम।।

लक्ष्मी गणेश का पूजन करें लोग।
लड्डुओं का लगता है भोग॥

पहनें नये कपड़े, खिलाते है मिठाई ।
देखो देखो दीपावली आई॥

 

6) Short Hindi Poems On Diwali in Hindi

पर्व है पुरुषार्थ का,
दीप के दिव्यार्थ का,
देहरी पर दीप एक जलता रहे,
अंधकार से युद्ध यह चलता रहे,
हारेगी हर बार अंधियारे की घोर-कालिमा,
जीतेगी जगमग उजियारे की स्वर्ण-लालिमा,
दीप ही ज्योति का प्रथम तीर्थ है,
कायम रहे इसका अर्थ, वरना व्यर्थ है,
आशीषों की मधुर छांव इसे दे दीजिए,
प्रार्थना-शुभकामना हमारी ले लीजिए!!
झिलमिल रोशनी में निवेदित अविरल शुभकामना
आस्था के आलोक में आदरयुक्त मंगल भावना!!!

 

7) साथी, घर-घर आज दिवाली!

फैल गयी दीपों की माला
मंदिर-मंदिर में उजियाला,
किंतु हमारे घर का, देखो, दर काला, दीवारें काली!
साथी, घर-घर आज दिवाली!
हास उमंग हृदय में भर-भर
घूम रहा गृह-गृह पथ-पथ पर,
किंतु हमारे घर के अंदर डरा हुआ सूनापन खाली!
साथी, घर-घर आज दिवाली!
आँख हमारी नभ-मंडल पर,
वही हमारा नीलम का घर,
दीप मालिका मना रही है रात हमारी तारोंवाली!
साथी, घर-घर आज दिवाली!

– हरिवंशराय बच्चन

 

8) जगमग सबकी मने दिवाली

जगमग सबकी मने दिवाली,
खुशी उछालें भर-भर थाली।
खील खिलौने और बताशे,
खूब बजाएं बाजे ताशे।
ज्योति-पर्व है,ज्योति जलाएं,
मन के तम को दूर भगाएं।
दीप जलाएं सबके घर पर,
जो नम आँखें उनके घर पर।
हर मन में जब दीप जलेगा,
तभी दिवाली पर्व मनेगा।
खुशियाँ सबके घर-घर बाँटें,
तिमिर कुहासा मन का छाँटें।
धूम धड़ाका खुशी मनाएं,
सभी जगह पर दीप जलाएं।
कोई कोना ऐसा हो ना,
जिसमें जलता दीप दिखे ना।
देखो, ऊपर नभ में थाली,
चन्दा के घर मनी दिवाली।
देखो, ढ़ेरों दीप जले हैं,
नहीं पटाखे वहाँ चले हैं।
कैसी सुन्दर हवा वहाँ है,
बोलो कैसी हवा यहाँ है।
सुनो, पटाखे नहीं चलाएं,
धुआँ, धुन्ध से मुक्ति पाए।

– आनन्द विश्वास

 

9) Short Happy Diwali Poems in Hindi

Ayi Re Ayi Diwali
Patakhe tohfe layi Diwali
Dil ko khush karne ayi Diwali
Ayi re ayi diwali
Ayi re ayi diwali
Maze karte huye bacche dekho
Mummy ka na Papa ka dar hai
School ka na Teacher ka dar hai
Bulb fool lagate Papa
Mandir sajati dekho Mummy
Bacche hain khelte koodte
Pathako main ekdum must hai
Khaana dekho banati chachi
Chocolate khate dekho chacha
Bhagwanji ki puja main sab
Shish jhukn ke baithe dekho
Arti lekar or parshaad khaakar
Jhoom utha saara parivaar
Ayi re ayi diwali
Ayi re ayi diwali
Khushiya dekho lai diwal
Ayi Re Ayi Diwali

 

10) Small Poems On Diwali in Hindi Fonts

दीपों का त्यौहार दिवाली आई है,
खुशियों का संसार दिवाली आई है.

घर आँगन सब नया-सा लगता है,
नया -नया परिधान सभी को फबता है,
नए नए उपहार दिवाली लायी है,
खुशियों का संसार दिवाली लायी है.

दीप सजे जैसे मोती की लड़ियाँ हैं,
नन्हे -नन्हे हाथों में फूलझड़ियाँ हैं,
जलते हुए अनार दिवाली लायी है,
खुशियों का संसार दिवाली लायी है.

– रंजना राजेश चौधरी

 

Happy Diwali Poems in Hindi
Beautiful Happy Diwali Poems in Hindi for Greeting Card

 

11) Happy Diwali Poetry in Hindi

Aayaa tyohaar Diwali ka
Bachcho ki khushhali ka
Bablu kahate papa se
Mujhako PC lana hai
guriya kahati mammi se
hame sitar bajana hai
papa bare achambhe me hai
ye mausam kangali ka
Aayaa tyohaar diwali ka
Bibi kahati pati dev se
Jab bonus tum paayoge
Sabse pahale haar sunahara
La mujhako pahnaao ge
Pati dev to mook bane hai
Rupaya denaa udhaari ka
Aayaa tyohaar diwali ka
Sab ki farmaish se tang huye hai
Bablu guriya ke papa ji
Patni to sir chadh kar bole
Kabhi na kahati aao ji
Ab bhaag na sakate papa ji
Jo theka liye rakhwali ka
Aayaa tyohaar diwali ka

 

12) Diwali Short Poem for Children

सोने की बाती, चाँदी सा उजाला,
दीपावली का पर्व है मतवाला.

बम फटे और चले पटाखे,
रोशनी से मूंद -मूंद गयी आँखें.

अमावस का धुला दाग काला,
दीपावली का पर्व मतवाला.

फसल आई घर शुभ यही लाभ,
हिसाब नए शुरू यही रंग आम.

बधाई मिठाई का चला है दौर,
साफ़ स्वछता है हर ठौर.

नया कैलेंडर ये बतलाता,
दीपावली का पर्व है मतवाला.

– गफूर ‘स्नेही’

 

13) Happy Deepavali Kavita in Hindi

Jhilmiljhilmil bijli ki
Rang Birangi Ladiyan
Nanhe munne hathon main veh
Dil fareb Phuljhariyan
Diwali hai Parv Milan ka,
Bharat milihin nij bhai
Chaurahe, mandir, galiyon main
Lage hue hain mele
Nazar pade jis or dikhe,
Bhare khushi se chehre
Chaudah baras baad laute hain,
Siya Lakhan Raghurai
Diwali ke din hain jaise,
Ghar main ho koi shagai
Andar bahar hoye Safedi,
Khush Amma, Khush daadi
Govardhan ko dhare chhanguriya
Inhi dinan gosayin,
andhere ki raina bete ,
Faila hai ujiyara .

 

14) जंगल में दिवाली Cute Diwali Poem for Kids

दिवाली पर चूहे जी ने,
नया सूट सिलवाया.

बिल्ली रानी ने परिधान,
लन्दन से मंगवाया.

शेरजी ने भी मंगवाई,
जोधपुर की शेरवानी,
बन्दर भैया लेकर आया,
नीला सूट पठानी.

भालू जी का सफ़ेद कोट,
सबके मन को भाया,
हाथी दादा का कुर्ता पाजामा,
कलकत्ता से आया.

जंगल सजा पेड़ मुश्काए,
पवन चली मतवाली,
धूम धाम से सबने मनाई,
जंगल में दिवाली.

– महेंदर कुमार वर्मा

 

15) Hindi Poems On Diwali in Hindi Characters

अपने घर को तो हमने
चिरागों से रौशन कर दिया
दिये जलाएं ढेरों
और अमावस का सारा तम
पल भर में हर लिया।

माँ लक्ष्मी के स्वागत की
सारी तैयारी कर ली
मिठाई और मेवों से
पूजा की थालियाँ भर ली।

छोड़े ढ़ेर सारे पटाखे
और फुलझड़ियाँ
दोस्तों और रिश्तेदारों को दी
ढ़ेरों बधाईयाँ।

कर दी मीठे पकवानों की
थालियाँ खाली
लो मन गयी हमारी
एक और दिवाली।

पर ना जाने कितने घर हैं
जहाँ आज भी दिया जला नहीं
ना जाने कितनी हैं आँखें
जिनमें कोई ख़्वाब अब तक पला नहीं।

क्या सिर्फ अपने घर को रौशन कर देने से
दिवाली मन जाती है ?
दिवाली है बुराई पर अच्छाई की
विजय का प्रतीक
क्या सिर्फ लक्ष्मी पूजन से
हमारे कर्तव्यों की छुट्टी हो जाती है ?

रोशन कर दो इस दिवाली
अपने-अपने अंतर्मन को
और हर लो उन सबके अंधरे
जो जीते हैं सुबह शाम तम को।
ताकि बन जाए उनकी भी ये शाम निराली
और मन जाए हमारी एक सार्थक दिवाली।

– Monika Jain ‘पंछी’

 

16) Inspirational Diwali Poem in Hindi

एक दिया ऐसा भी हो,
जो भीतर तलक प्रकाश करे,
एक दिया मुर्दा जीवन में
फिर आकर क़ुछ श्वास भरे
एक दिया सादा हो इतना,
जैसे सरल साधु का जीवन,
एक दिया इतना सुन्दर हो,
जैसे देवों का उपवन
एक दिया जो भेद मिटाये,
क्या तेरा -क्या मेरा है,
एक दिया जो याद दिलाये,
हर रात के बाद सवेरा है
एक दिया उनकी खातिर हो,
जिनके घर में दिया नहीं ,
एक दिया उन बेचारों का,
जिनको घर ही दिया नहीं
एक दिया सीमा के रक्षक,
अपने वीर जवानों का
एक दिया मानवता – रक्षक,
चंद बचे इंसानों का !
एक दिया विश्वास दे उनको ,
जिनकी हिम्मत टूट गयी ,
एक दिया उस राह में भी हो ,
जो कल पीछे छूट गयी
एक दिया जो अंधकार का ,
जड़ के साथ विनाश करे ,
एक दिया ऐसा भी हो ,
जो भीतर तलक प्रकाश करे। …
आपको प्रकाशोत्सव
“दीपावली ” की हार्दिक -शुभकामना

 

17) Diwali Poems in Hindi For Children

दिवाली क दीपक जगमगाये आपके अगन में ,
सात रंग सजे इस साल आपके अगन में

आया है ये त्यौहार खुसिया लेके
हर खुसी सजे इस साल आपके अगन में

रोसनी से हो रोसन हर लम्हा आपका
हर रोसनी सजे इस साल आपके अगन में

दुआ हम करते है आप सलामत रहे
हर दुआ सजे इस साल आपके अगन में

हैप्पी दिवाली 2017

 

18) Heart Touching Kavita on Diwali

आज एक वर मांगता हूँ मैं तो अपने राम से,
दीप को प्रज्वलित कर दो आप अपने नाम से.
पाप का अँधेरा मिटे,
और शान्ति का साम्राज्य हो.
बंद हो जाए लड़ाई मजहबों के नाम से.
आज एक वर मांगता हूँ मैं तो अपने राम से,

दीपक जले फ़िर प्रेम का,
सौहार्द की हो रोशनी.
चलने लगे फ़िर से ये दुनिया राम के आदर्श पे.
राम के आदर्श पे धरती बने फ़िर स्वर्ग सी.
कहे कवि “मेजर” ये दुनिया है तेरे एहसान से.
आज एक वर मांगता हूँ मैं तो अपने राम से,
दीप को प्रज्वलित कर दो आप अपने नाम से.

– जीतेन्द्र कुमार तिवारी ” मेजर”

 

19) Beautiful Diwali Poem for Messages

आओ मिलकर दीप जलाएं
अँधेरा धरा से दूर भगाएं
रह न जाय अँधेरा कहीं घर का कोई सूना कोना
सदा ऐसा कोई दीप जलाते रहना
हर घर -आँगन में रंगोली सजाएं
आओ मिलकर दीप जलाएं.

हर दिन जीते अपनों के लिए
कभी दूसरों के लिए भी जी कर देखें
हर दिन अपने लिए रोशनी तलाशें
एक दिन दीप सा रोशन होकर देखें
दीप सा हरदम उजियारा फैलाएं
आओ मिलकर दीप जलाएं.

भेदभाव, ऊँच -नीच की दीवार ढहाकर
आपस में सब मिलजुल पग बढायें
पर सेवा का संकल्प लेकर मन में
जहाँ से नफरत की दीवार ढहायें
सर्वहित संकल्प का थाल सजाएँ
आओ मिलकर दीप जलाएं
अँधेरा धरा से दूर भगाएं.

– कविता रावत

 

20) Encouragement Diwali Poetry

आँखों से आँखों में मोहब्बत के दीये जलाना
झिलमिल-झिलमिल दीपों सा हिल-मिल के खुशी मनाना
कहीं ज्ञान का कही विज्ञान का रोशनी बीखेर
अँधेरा अदंर हो या बाहर तुम प्रेम से दीये जलाना
चाँद सूरज काफी नही है जग का तम हरने को
भर-भर मुट्ठी मशाल कोने -कोने पे जलाना
खंडहर हो या आलीशान महलें भेद-भाव न कर
अँधेरा रास न आया कीसी को तू हर जगह दीप जलाना
ये क्या बात हुई दिवाली में ही सिर्फ दीये जले
मकसद तमस मिटाना है तू वजह-बेवजह दीप जलाना
बुझे नही ज़िंदगी का चिराग किसी आंधी-तूफान से
गम और निराशा की कही कालिमा न रहे तू इतना दीप जलाना

– सुनील कुमार ’सोनू’

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